Main Nastik Kyu Hu, by Bhagat Singh
एक युवा क्रांतिकारी द्वारा ईश्वर के अस्तित्व, अंधविश्वास और धर्म के सामाजिक आधारों पर उठाए गए साहसी और तर्कपूर्ण प्रश्नों का कालजयी संग्रह।
“मैं नास्तिक क्यों हूँ” भगत सिंह का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वैचारिक रूप से उत्तेजक निबंध है। यह निबंध उन धार्मिक क्रांतिकारियों और मित्रों के सवालों का जवाब देने के लिए लिखा गया था जिन्होंने उनकी नास्तिकता पर प्रश्नचिह्न लगाया था। भगत सिंह इसमें स्पष्ट करते हैं कि उनकी नास्तिकता किसी अहंकार या सनक का परिणाम नहीं है, बल्कि गहन अध्ययन, आत्म-चिंतन और तर्कसंगत विश्लेषण की लंबी प्रक्रिया का फल है।
वह ईश्वर को मानने के पारंपरिक तर्कों का खंडन करते हैं और समाज में धर्म तथा ईश्वर के नाम पर फैले शोषण और पाखंड पर तीखा प्रहार करते हैं। वे तर्क देते हैं कि एक क्रांतिकारी को किसी भी अलौकिक शक्ति पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी मुक्ति के लिए स्वयं के प्रयासों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विश्वास करना चाहिए। यह कृति उनके संपूर्ण समाजवादी और क्रांतिकारी दर्शन की वैचारिक नींव को स्पष्ट करती है।
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