Sewa Sadan, by Munshi Premchand (Hindi)
नारी के शोषण, दहेज की त्रासदी और समाज सुधार की गहरी भावना को उजागर करता प्रेमचंद का कालजयी उपन्यास।
“सेवासदन” मुंशी प्रेमचंद का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मार्मिक सामाजिक उपन्यास है जो तत्कालीन भारतीय समाज की कई जटिल समस्याओं, विशेषकर दहेज प्रथा और वेश्यावृत्ति की त्रासदी पर केंद्रित है। यह उपन्यास सुमन नामक एक उच्च मध्यमवर्गीय महिला के जीवन संघर्ष की कहानी है, जो समाज की कठोर और भ्रष्ट व्यवस्था का शिकार बनती है।
सुमन का जीवन दहेज की कुप्रथा के कारण दूभर हो जाता है। अपमान और गरीबी से तंग आकर, जब वह वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल दी जाती है, तो समाज उसे बहिष्कृत कर देता है। हालांकि, उपन्यास का मुख्य संदेश निराशा में नहीं है; बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे एक अपमानित आत्मा भी आत्म-सुधार और समाज सेवा के माध्यम से अपने जीवन को एक सार्थक दिशा दे सकती है। यह प्रेमचंद का पहला ऐसा उपन्यास था जिसने वेश्याओं के सामाजिक बहिष्कार के बजाय उनके पुनर्वास और सुधार के विचार को प्रस्तुत किया।
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